फर्जी ‘डिजिटल अरेस्ट’ से बचा परिवार, सिंगरौली पुलिस की साइबर जागरूकता लाई रंग
SAFE CLICK-2026 अभियान के चलते 70 हजार की साइबर ठगी नाकाम, स्कूल में सुरक्षित मिला बच्चा
सिंगरौली/ मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे SAFE CLICK-2026 साइबर जागरूकता अभियान 2.0 का सकारात्मक असर सिंगरौली जिले में देखने को मिला है। अभियान के तहत दी गई जागरूकता के कारण एक परिवार फर्जी “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ₹70 हजार की साइबर ठगी का शिकार होने से बच गया।
पुलिस के अनुसार मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में एक परिवार ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सर्वप्रिय सिन्हा को बताया कि साइबर जागरूकता कार्यक्रम में मिली जानकारी के कारण उन्होंने समय रहते ठगों की चाल समझ ली।
परिजनों ने बताया कि उनकी पुत्री शबनम आरा के मोबाइल पर व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने पुलिस अधिकारी की फोटो लगाकर खुद को पुलिसकर्मी बताया और कहा कि उनका बच्चा गलत कार्य में पकड़ा गया है तथा उसे पुलिस हिरासत में लिया गया है। आरोपी ने बच्चे को छोड़ने के नाम पर तत्काल क्यूआर कोड के माध्यम से ₹70 हजार भेजने का दबाव बनाया। कॉल के दौरान बच्चे के रोने और “मम्मी… मुझे बचा लो” जैसी आवाजें सुनाकर महिला को भयभीत करने का प्रयास किया गया।
इसी बीच महिला के पिता ने पूरी बात समझी और सिंगरौली पुलिस द्वारा चलाए जा रहे साइबर जागरूकता अभियान में दी गई सलाह को याद करते हुए तुरंत पुलिस और संबंधित विद्यालय से संपर्क किया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम विद्यालय पहुंची, जहां जांच में बच्चा अपनी कक्षा में सुरक्षित पढ़ाई करता मिला। पुलिस ने बच्चे का फोटो परिजनों को भेजकर उनकी चिंता दूर की। इसके बाद स्पष्ट हो गया कि कॉल करने वाला साइबर ठग था, जो पुलिस अधिकारी बनकर परिवार से ठगी का प्रयास कर रहा था।
परिवार ने बताया कि यदि वे SAFE CLICK-2026 अभियान में शामिल नहीं हुए होते, तो घबराहट में ठगों के बताए खाते में पूरी राशि भेज देते। उन्होंने समय पर मिली जागरूकता के लिए सिंगरौली पुलिस का आभार व्यक्त किया।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कोर्ट या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पैसे मांगे, तो उस पर विश्वास न करें। “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। किसी भी अनजान खाते या क्यूआर कोड पर धनराशि ट्रांसफर न करें और पहले संबंधित संस्था या पुलिस से सत्यापन करें। किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या cybercrime.gov.in पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में नगर पुलिस अधीक्षक विंध्यनगर उमेश प्रजापति, थाना प्रभारी विंध्यनगर अर्चना द्विवेदी एवं चौकी जयंत पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्चे की सकुशल स्थिति की पुष्टि कर परिवार को बड़ी ठगी से बचाया।
