बैढ़न शराब दुकान का 30 सेकंड वाला ‘वीडियो बम’ फटा: सीएम का कानून रद्दी, ओम साईं राम ग्रुप का ‘जंगलराज’, आबकारी अधिकारी सतीश कश्यप की निगरानी ‘लाश’ बनी
तय समय से पहले-बाद खुलेआम बिक्री, कैमरे पर कैद ‘लूट का लाइव टेलीकास्ट’ करीब एक महीने के बाद भी नहीं जागा विभाग, जनता पूछे सिंगरौली में सरकार है या ठेकेदार?

सिंगरौली बैढ़न की शराब दुकान से लीक हुआ 30 सेकंड का वीडियो अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का पोस्टमॉर्टम कर रहा है। आरोप है कि ओम साईं राम ग्रुप द्वारा संचालित इस दुकान में नियम-कायदे को पैरों तले रौंदा जा रहा है और जिला आबकारी अधिकारी सतीश कश्यप का अमला चादर तानकर सो रहा है। सोशल मीडिया पर यह ‘वीडियो बम’ फूटते ही पूरा सिंगरौली दहल गया है।
कैमरे पर कैद ‘कानून की हत्या’: ओम साईं राम ग्रुप को किसका वरदान
वायरल वीडियो में आरोप है कि बैढ़न की दुकान पर तय समय से पहले शटर उठ रहे हैं और बाद में भी ‘माल’ बिक रहा है। भीड़, धक्का-मुक्की, अव्यवस्था – सब लाइव। स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा: “यह दुकान नहीं, आबकारी विभाग के मुंह पर कालिख है खून खौलाने वाला सच:* पहले भी शिकायतें हुईं, पर सतीश कश्यप की टीम ने हर बार फाइल दबा दी। क्यों?
सीएम का नारा vs बैढ़न का नजारा: सतीश कश्यप, जवाब दो
मुख्यमंत्री मंच से गरजते हैं कानून सबके लिए बराबर’। मगर बैढ़न का वीडियो चीख रहा है कि सिंगरौली में सीएम का आदेश सिर्फ भाषण है। आरोप है कि सतीश कश्यप के राज में ओम साईं राम ग्रुप ‘सुपर सरकार’ बन चुका है।
ओम साईं राम ग्रुप और आबकारी विभाग चर्चा के केंद्र में
विवाद के केंद्र में ओम साईं राम ग्रुप द्वारा संचालित बताई जा रही शराब दुकान है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब बिक्री के समय और संचालन को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। वहीं आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
वायरल वीडियो के बाद जनता में आक्रोश
वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि वीडियो में दिख रही परिस्थितियां सही पाई जाती हैं, तो यह केवल एक दुकान का मामला नहीं बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। लोगों का कहना है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
जनता अब कई सवाल पूछ रही है क्या शराब दुकानों की नियमित जांच हो रही है? क्या शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाती है? क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके पर सत्यापन किया यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जवाबदेही किसकी तय होगी?
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि वायरल वीडियो की तकनीकी और प्रशासनिक जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जानी चाहिए अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ एक वायरल वीडियो का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विश्वसनीयता का है जिस पर कानून के पालन की जिम्मेदारी टिकी हुई है। जांच क्या कहती है और प्रशासन क्या कार्रवाई करता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।यह संस्करण तीखा, प्रभावशाली और पत्रकारिता की मर्यादा के भीतर है, ताकि खबर मजबूत भी लगे और कानूनी जोखिम भी न हो।



