
सिंगरौली
रिश्वत के आरोप पर पंचायत भवन में जड़ा ताला, विधायक के हस्तक्षेप के बाद खुला
पटवारी पर 2 हजार रु रिश्वत मांगने का आरोप, तीन माह से लंबित नामांतरण बना विवाद की वजह
सिंगरौली– जिले की ग्राम पंचायत गन्नई में जमीन नामांतरण और सीमांकन के मामले में कथित रिश्वतखोरी एवं लापरवाही को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। आदिवासी किसान जगधारी सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने पंचायत भवन पर ताला जड़कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित पटवारी ने नामांतरण कराने के लिए 2 हजार रु की रिश्वत ली, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी न तो नामांतरण किया गया और न ही सीमांकन की कार्रवाई पूरी की गई। इससे भूमि विवाद बढ़ गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम गन्नई निवासी जगधारी सिंह लगातार तीन माह से पटवारी के कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। आरोप है कि पटवारी ने काम करने के नाम पर 2 हजार रु लिए और 15 दिनों के भीतर नामांतरण करने का आश्वासन दिया था, लेकिन समय बीतने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी बीच बारिश का मौसम शुरू होने से खेत की सीमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने तथा पटवारी द्वारा कथित रूप से धमकाने से नाराज ग्रामीणों ने पंचायत भवन में ताला लगाकर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही देवसर विधायक राजेंद्र मेश्राम मौके पर पहुंचे। उनके साथ जनपद सदस्य, पंचायत सचिव, सरपंच और रोजगार सहायक सहित प्रशासनिक अमला भी मौजूद रहा। विधायक ने ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पटवारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जगधारी सिंह सहित अन्य लंबित नामांतरण एवं सीमांकन के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का आश्वासन दिया।
विधायक के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने पंचायत भवन का ताला खोल दिया और आंदोलन समाप्त कर दिया। इसके बाद पंचायत भवन में सामान्य कामकाज शुरू हो सका। पूरे घटनाक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जगधारी सिंह सहित सभी लंबित जमीन संबंधी मामलों का तत्काल निष्पक्ष निराकरण किया जाए, रिश्वत मांगने के आरोपित पटवारी के विरुद्ध जांच कर निलंबन सहित कठोर कार्रवाई की जाए तथा पंचायत भवन में नियमित रूप से शासकीय अधिकारियों की जनसुनवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।



